जिले में जिन किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान राशि पर सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम दिए गए है, यदि यह सिस्टम अपने निर्धारित स्थान पर नहीं लगवाए गए है और किसी अन्य व्यक्ति को बेच देते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा सब्सिडी का सारा पैसा संबंधित आवेदक से वापस जमा करवाया जाएगा। यह सिस्टम जिला में बिजली की खपत को कम करने के लिए प्रदान किए गए है।

जिला प्रशासन के पास ऐसी शिकायतें आई थी कि कुछ लोग अनुदान पर सोलर सिस्टम लेने के बाद इसे दूसरे व्यक्ति को बेच देते है। वहीं जहां यह सोलर प्लांट लगना चाहिए वहां पर नहीं लग पाता। इसके अलावा जो कर्मचारी सर्वे करने के लिए जाते है वो भी कोई ध्यान नहीं देते। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जिला प्रशासन अब सख्त हो गया है। अब आदेश जारी कर दिए है कि अगर गड़बड़ी मिलती है तो सब्सिडी की पूरी राशि वसूल करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पंप लेने वाले किसानों को जमा करवाने होंगे दस्तावेज।

क्षय ऊर्जा विभाग में सोलर पंप लेने वाले किसानों को दो दिसंबर तक एडीसी कार्यालय में आवेदन की मूल प्रति, आधार कार्ड, जमीन की फर्द व बैंक रसीद इत्यादि दस्तावेज जमा करवाने होंगे। विभाग द्वारा सोलर सिस्टम पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। सोलर पंप के लिए निर्धारित की गई जगह से दूसरी जगह सिस्टम को नहीं लगा सकते हैं। सिस्टम को दूसरी जगह लगाने के लिए एडीसी कार्यालय की अनुमति जरूरी होगी, क्योंकि इस सिस्टम पर जीपीएस का प्रयोग होता है। सिस्टम की जगह बदले को लेकर विभाग गंभीर है। विभाग की गठित टीम या अधिकारी किसानों को दिए गए सोलर पावर सिस्टम का निरीक्षण कर सकते हैं और जहां सोलर सिस्टम लगे नहीं मिले ऐसे मामलों में किसान व कंपनी दोनों पर ही कार्यवाही की जा सकती है, क्योंकि कंपनी का काम निर्धारित की गई जगह पर सोलर सिस्टम लगाने का है।

विभाग द्वारा तीन एचपी से दस एचपी तक के सोलर पंप लगाने के लिए किसानों से आवेदन मांगे गए थे। जिस किसान को सोलर सिस्टम अलाट हुआ है और वह दूसरी जगह मिला तो संबंधित कंपनी के अलावा किसान पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिस सब्सिडी में छूट दी गई थी उसे भी भरवा लिया जाएगा।

अजय चोपड़ा, अतिरिक्त उपायुक्त फतेहाबाद

Source: Jagran